Friday, 2 December 2016

जन्मदिन की बहुत बहुत बधाईयाँ *माँ* 🙏🏻

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Monday, 28 November 2016

मौसम आ गया


मौसमें इश्क में खोने का मौसम आ गया,

तेरी यादों में डूबने का मौसम आ गया।।

जरा ठहरो मैं राह के काॅटे चुन के अलग कर लूॅ,

शायद अब कलियों के खिलने का मौसम आ गया।।

कुछ जरा नजरों की धुन्ध छाॅट लेने दो,

फिर से सावन बरसने का मौसम आ गया।।

पुराने जख्मों के भर जाने से खुश ना हो एहले चमन,

अब नये-नये जख्मों के मिलने का मौसम आ गया।।

मंजिल सामने दिखती है तो क्या फर्क पडता है,

हमसफर के मोड मुडने का मौसम आ गया।।

Written by-

Devprakash Prajapati

Monday, 7 November 2016

सपने


हमनें भी थे देखे सपने,
कुछ छोटे कुछ बड़े कई,
चाहत थी बस साथ हो अपने,
चाहत ना पूरी हुई वही,
ज़ुनून फ़िर भी कम ना हुआ,
बस टूटे जब भी तो वजह थी वही,
हमनें भी थे देखे सपने कई...!!! L

प्यार


ये प्यार का खेल निराला है,
हमें कभी समझ ना आने वाला है,
कभी प्यार पे यकीं दिलाये वो,
कभी ख़ुद ही छोड़ चला जाये वो,
जब कहे कोई उन्हें बेवफ़ा,
फ़िर लौट कही से आ जाये वो,
क्या कहूं इसे...ये तू ही बता,
गर है प्यार तुझे तो तू भी जता,
समझाना मुझको तो आता नहीं,
क्या मेरे आँसू तुझे दिखते नहीं,
चाहा है तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा,
ए काश! तू फ़िर से लौट के आ,
बंधन सारे अब तोड़ के आ,
इस बार ना तुझे जाने दूंगी,
तुझमें ख़ुद को मैं पा लूँगी,
मैंने माँग लिया है रब से तुझे,
हम जनम जनम बस प्यार करे...!!!
#Devprabha_Paridhi

Friday, 7 October 2016

सिर्फ तुम


बातें तुझसे हो ना हो,
बातों में मेरी *सिर्फ तुम*

महफिल में रहूँ मैं तन्हा सी,
तन्हाई में मेरी *सिर्फ तुम*

चेहरे पर रखूँ मैं कितनी हँसी,
अश्कों में मेरी *सिर्फ तुम*

ए काश कभी तू भी तो समझ,
हर दिन, हर पल, मेरी हर साँस में *सिर्फ तुम*

#Devprabha_Paridhi

Thursday, 7 July 2016


आओ एक ईद मनाते हैं..

कुछ सेवेयां तुम ले आओ...
कुछ उसमे दूध हम मिलाते हैं...
आओ एक ईद मानते हैं...
एक दिया तुम रख दो मंदिर में...
एक शमां हम मस्जिद में जलाते हैं...
आओ एक ईद मनाते हैं...
क्यों तेरा मेरा कर लड़ते रहे अब तक ..
शाहे शरीर है... बे- गेरत ये सब को बताते हैं...
आओ एक मुक्कमल ईद मनाते हैं...
बहुत हो चुका ..धर्म के नाम पर इंसानियत का बंटवारा..
अब एक हो कर सारी दुनियां को ताकत दिखाते हैं...
आओ सब मिल कर एक ईद मनाते हैं....
आओ उन्हें हारा हुआ सिकंदर...
और कब्र में दफ़न अकबर महान दिखाते हैं.....
जो कहते थे कभी की हमारे दम से है दुनियां..
आओ सब मिल कर एक ईद मनाते हैं...
ईद की सभी को राम राम....
सारी दीवारें...तेरा मेरा की छोड़ कर दूध और सेवियों से एक हो जाते हैं....
आओ मिल कर एक ईद मनाते हैं....

Sunday, 26 June 2016

#Only_Love

“धड़कनें बहुत तेज़ थी सुबह,
तुम कल रात ख्वाबों में आये थे क्या?”

-DJ Paridhi

Tuesday, 21 June 2016

वो पल भी अजीब था, या शायद मैं खुशनसीब था...!!!

वो पल भी अजीब था,
या शायद मैं खुशनसीब था,
हर दिन की तरह गुज़र रहा था,
लम्हों में गुज़रता एक लम्हा जुड़ रहा था,
ख्यालों में तस्वीर सजायी थी तुम्हारी,
बारिश की फुहारों में तुम्हें गढ़ रहा था,

सामने से गुज़र कर अचानक वो चेहरा दिखा,
जिसे कुछ देर पहले मैं बूंदों में पढ़ रहा था,
दिल घबरा सा गया,मैं तो सकपका सा गया,
लगा यूं अचानक ख्यालों की भी चोरी हो गयी,
करते हैं इश्क़ हज़ारों आशिक़ सावन की बारिश में,
फ़िर मेरी ही क्यों आशिक़ी यूं झलक भर पेश की गयी,

सावन की झड़ी बढ़ रही थी,
मेरी आशिक़ी भी उमड़ रही थी,
ढूंढता फिरा उस ‘परी’ सा मुखड़ा जहाँ में,
ना आया नज़र, कहीं उड़ गया हवा में, :(
अबके सावन तू ये हसरत पूरी करना,
मेरे महबूब की बांहों में इश्क का बरसे झरना,
भीग जाऊं लिपट कर उसी से,
या हो जाऊ एक सिमट कर उसी में,

एक बार ए ख़ुदा वो पल लौटा दे मुझे,
उस पल को रोककर सदियां जी लूं उसमें,
जो पल अजीब था, जिसमें मैं ख़ुशनसीब था...!!!

-DJ Paridhi

Saturday, 18 June 2016

कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ याद अधूरी...


कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ याद अधूरी,
रह गयी मेरी हर बात अधूरी,
चाहत थे तुम ही- पहली और आख़िरी,
अब रह गयी मेरी हर चाह अधूरी,
फ़लसफ़े अधूरे, हसरतें अधूरी,
बढ़ती गयी तुमसे, हर पल में दूरी,
झूठे थे सरे वादे, जिनकी खातिर मैंने,
कर दी नाम पे तेरे, दुनिया मेरी पूरी,
अब तो होगी तेरे खातिर, मेरी हर साँस अधूरी,
कुछ ख़्वाब अधूरे, कुछ याद अधूरी...!!!
-DJ Paridhi

काश! तुझे इस जहां से अपनी दुनिया में ले जाती !!!


काश! तुझे इस जहां से अपनी दुनिया में ले जाती,
जहां सिर्फ तू और मैं रहते है,
तेरे सपने,मेरी आँखे...
तेरा दर्द,मेरा दर्द...
मेरी खुशियाँ,सारी तेरी...
तुझमें सारी दुनिया मेरी,
कुछ अधूरे से ख्वाब मेरे,
पलकों पे तेरी सजते हो जैसे,
बस यूं ही रूठ जाना मेरा,
और प्यार से मनाना तेरा,
बिन कहे सब समझ जाती....
काश! तुझे इस जहां से अपनी दुनिया में ले जाती !!!
-DJ Paridhi

आ भी जा...



आ भी जा लौटकर,
तुझे पता है ना !
उदास कर देता है तू,
यूं उदास होकर,
तुझे यकीं ना होगा,
कल रात ख़्वाब में भी,
तेरा नाम गुनगुनाया था मैंने,
अपनी सांस रोककर,
आ भी जा...!!!
-DJ Paridhi

#Feel The Feelings


ज़िंदगी कितनी आसान हो....
गर रूठे भी ख़ुद से और मनाये भी ख़ुद को !!!

-DJ Paridhi

कितने दिन गुज़रे...


 कितने दिन गुज़रे,कोई बात नहीं हुई ना...
कभी हम तुम चलें?
कहीं ख़ामोश बैठे,
और समझ ले दोनों की सारी अनकही..
कितने दिन गुज़रे,कोई बात नहीं हुई...!!!

-DJ Paridhi

ईश्वर...


कभी जो निराशा तुझे घेर ले,
ख़ुशियों का दामन मुँह फेर ले,
लगे यूं तुझे की है सब कुछ ख़त्म,
अब जिंदगी में है बस ज़ख्म ही ज़ख्म,
सारी हिम्मत तेरी जब टूटने लगे,
अपने तुझसे जब रूठने लगे,
लाख कोशिश भी बेईमानी लगने लगे,
और सब कुछ कहानी लगने लगे,
फ़िर भी उसी मोड़ पर मैं मिलूंगा तुझे,
जहाँ से ये दुनिया तुझे फ़िर सुहानी लगे |

बस तू आँखों को कर लेना बंद इस तरह,
की तस्वीर पर हो एक समतल सतह,
आशा के उजाले फ़िर नजर आयेंगे,
तेरा हाथ पकड़े वो दिख जायेंगे |

वो जो निराशा को आशा में बदल देता है,
तेरी झोली को ख़ुशियों से भर देता है,
वो ईश्वर है मेरा, वो ताकत है मेरी |
वो श्रद्धा, विश्वास की मूरत है मेरी ||

तुझे मेरे ईश्वर है शत-शत नमन,
दे आशीर्वाद में वो ताकत जो कर दे सारी बुराइयों का दमन |
-DJ Paridhi

Sunday, 5 June 2016

कल रात हंसी एक ख़्वाब आया !!!


कल रात हंसी एक ख़्वाब आया, हाथों में उसका हाथ आया,
मैं शरमा गयी,फ़िर घबरा गयी, हौले से वो मेरे पास आया...
कल रात हंसी एक ख़्वाब आया !!!
साँसे मेरी फ़िर बढ़ती गयी, धड़कन रुकने का नाम नहीं,
जब बांहों ने उसकी मुझे घेरा, महफूज़ सा कुछ यूं मुझको लगा,
जैसे कोई हमराज़ हो वो, बरसो की मेरी तलाश हो वो,
ना जाने क्यों वो बैगाना, कुछ अंजाना कुछ पहचाना,
मुझको मुझसे ही छीन गया, और मुझको ये पता भी ना लगा...
कल रात हंसी एक ख़्वाब आया !!!
फ़िर दूर वो पल-पल जाने लगा, साँसों को मेरी बढ़ाने लगा,
मैंने भीगी पलकों से रोका उसे, जी भर के मुझे वो सताने लगा...
और दूर वो पल-पल जाने लगा !!!
अब आँख खुली तो लगता है, साथी वो मेरा तकिया है,
पर पलकें अब भी भीगी है, ना जाने कौन वो छलिया है...
फ़िर भी उससे मिलना चाहूं, यादों में उसकी रहना चाहूं,
हर ख़्वाब में उनसे मिलने को, चलो फ़िर से हम सो जाते है |
उन मीठी मीठी बातों में, और संग में प्यारी बाहों के,
शायद.......
कल रात हंसी फ़िर ख़्वाब आये, हाथों में उसका हाथ आये !!!
-DJ Paridhi

Sunday, 24 April 2016

ज़ुनूनी ख्वाहिशें


   ख्वाहिशें हथेली पर लेकर घुमे हो कभी,
हर पल ज़ुनून की आग में जलना होता है,
आँखों से नींद का रिश्ता टूटा है कभी,
रात भर सपनों को जीना होता है,
कोई सुन ना ले, कि पगली कहेगा,
और ज़माने ने कुछ किया है कभी...!!!
-DJ Paridhi

Wednesday, 13 April 2016

तेरी यही बात तो मेरे दिल को भाती है...!!!

         
तेरी यही बात तो मेरे दिल को भाती है,
जो तुझे औरों से अलग बनाती है,
दिल में है तेरे प्यार का सागर,
होंठों पे तेरी मुस्कान का गागर,
हर पल बस तेरा ही दीदार हो मुझे,
अब तो हर रोज़ तू मेरे सपनों में आती है,
तेरी यही बात तो मेरे दिल को भाती है,
जो तुझे औरों से अलग बनाती है….!!!
-DJ Paridhi

Tuesday, 12 April 2016

Metro Morning - renewing relationships

#Love - Lies in Silence_4

Love Lies in Silence

इतना भी नाम ना कर मेरा तेरे दीवानों में,
की जिस गली से गुज़रू...
तेरे नाम से लोग मुझे पहचानने लगें...!!!
Author - RV Singh

Monday, 11 April 2016

#Love - Lies in Silence_3


Painful Love

कितना अजीब दर्द है मेरी ज़िंदगी का,
हम उन्हें पा ना सके,जिन्हें खोने का डर हमें सताया जा रहा है...!!!
Author - RV Singh

Sunday, 10 April 2016

#Love - Lies in Silence_2


दूर ही सही,एहसास तो है उन्हें मेरे दर्द का,
अब तो ये दर्द भी मेरे लिए ज़रिया है ख़ुशी का....
Author - RV Singh

#Love - Lies in Silence_1


लिख दूँ किताब तेरे लिए ए दोस्त,
पर दिल नहीं चाहता तुझे कोई और पढ़े मेरे सिवा... 

Author - RV Singh

बैठ जाती हूं मिट्टी पे अक्सर


























बैठ जाती हूं मिट्टी पे अक्सर...
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है..
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।।
ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है पर सच कहती हूँ
मुझमे कोई फरेब नहीं है
जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि एक मुद्दत
से मैंने
न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!.
एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली..
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!
सोचती थी घर बना कर बैठुंगी सुकून से..
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!
सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब....
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |
शौक तो माँ-बाप के पैसो से पूरे होते हैं,
अपने पैसो से तो बस ज़रूरतें ही पूरी हो पाती हैं..
जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है..
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है..
कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते..
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते..
लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..
"
खुश हूँ और सबको खुश रखती हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करती हूँ..
मालूम हे कोई मोल नहीं मेरा,
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखती हूँ...!!!