मौसमें इश्क में खोने का मौसम आ गया,
तेरी यादों में डूबने का मौसम आ गया।।
जरा ठहरो मैं राह के काॅटे चुन के अलग कर लूॅ,
शायद अब कलियों के खिलने का मौसम आ गया।।
कुछ जरा नजरों की धुन्ध छाॅट लेने दो,
फिर से सावन बरसने का मौसम आ गया।।
पुराने जख्मों के भर जाने से खुश ना हो एहले चमन,
अब नये-नये जख्मों के मिलने का मौसम आ गया।।
मंजिल सामने दिखती है तो क्या फर्क पडता है,
हमसफर के मोड मुडने का मौसम आ गया।।
Written by-
Devprakash Prajapati

नज़रों से कह दो प्यार में मिलने का मौसम आ गया
ReplyDeleteबाहों में बाहें डाल के खिलने का मौसम आ गया
१) इस प्यार से तेरा हाथ लगा लहरा गए गेसू मेरे
कुछ भी नज़र आता नहीं मस्ती में मुझे तेरे परे
कंधे पे मेरे ज़ुल्फ़ के ढलने का मौसम आ गया, नज़रों ...
२) तुम मिल भी गए फिर भी दिल को क्या जाने कैसी आस है
तुम पास हो फिर भी होंठों में जाने कैसी प्यास है
होंठों की ठंडी आग में जलने का मौसम आ गया, नज़रों ...