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Saturday, 2 December 2017

माँ का दर्द

जब वो कुछ कह नहीं पाती... नजरें चुराती है,
दर्द का समंदर अपने अन्दर छुपाती है,
वो होंठों से मुस्कुराकर सबको दिखाती है,
ना जाने कैसे वो इतना कुछ सह जाती है,
छुपकर सबसे वो अपने आँसू बहाती है,
तिल-तिल कर मिटते अपने वज़ूद को वो,
आँखों पर चश्मा लिए अपने बच्चों में पाती है,
नामुमकिन है उसको इस कदर पूरा बयाँ करना,
इसीलिए वो मेरी माँ कहलाती है....

पति, जिससे थी प्यार और विश्वास की चाहत,
उसी से हमेशा ताने और अपमान पाती है,
बच्चों को ममता की छाँव में पाला,
अब उन्हीं से हर बात पर दुत्कार खाती है,
टूटकर भी हर तरह से वो अपना फ़र्ज निभाती है,
इसीलिए वो मेरी माँ कहलाती है....

माँ मेरी सब पर बस प्यार लुटाती है,
लाख दुःखों को सहकर भी उसके लबों पर उफ़ तक नहीं आती है,
देखकर उसको हर वक़्त मेरा दिल भर आता है,
क्या ईश्वर इस रूप में भी धरती पर आता है,
उम्र मेरी भी सारी मेरी माँ को लग जाये,
जीवन मेरा पूरा माँ के आँचल में समाये,
जिंदगी मेरी ये मुकम्मल हो जाती है,
माँ का मेरी गर एक अंश भी हो पाती है,
माँ ही तो मुझको साकार बनाती है,
इसीलिए वो मेरी माँ कहलाती है....

#Devprabha_Paridhi

Friday, 21 April 2017

बिटिया मेरी, आँख का तारा

बिटिया मेरी, आँख का तारा
जान से प्यारी, नाज़ो से पाला.......

सादगी उसमें है, खुशिया भी उससे
रिश्तो मे सारे ही रिश्ते उसी से है,
ममता कि छाँव वो, बहना का लाड़ भी,
प्यारी सी साथी है, बेटी का रूप भी,
हर ख़ुशी, हर गम मे, साथ रहे,
बिन तेरे तो सुने है धरती और अम्बर भी,
बिटिया मेरी, आँख का तारा
जान से प्यारी है,नाज़ो से पाला..........

उसकी इक हँसी, हर गम भुला देती
दौड़ती भागती, जब पास वो है आती
कितनी वो शीतल है, निश्छल और चंचल है,
उसमे वो ताकत, जो, घर को महल कर दे,
उसने ही मुझको जीना सिखाया
वो ही तो धुप मे,ठंडी सी छाया
बिटिया मेरी, आँख का तारा
जान से प्यारी है,नाज़ो से पाला..........

ना दर्द मिले, ना भीगे आँचल तेरा
हर दिन हो ख़ुशियों का सवेरा,
बिटिया से ही होगा उजियारा,
जीवन दो उसे सबसे प्यारा,
बचा लो उसे जिसने मारा,
लौटा दो उसे ये जग सारा,
बिटिया मेरी, आँख का तारा
जान से प्यारी है,नाज़ो से पाला..........

#Devprabha_Paridhi

Friday, 2 December 2016