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Saturday, 1 July 2017

कभी कभी वो बहुत याद आते है...

This time poem is dedicated to my special friend Arun Ji ❤❤❤


अक्सर कभी तन्हाई में वो बहुत याद आते है,
यांदो के भँवर मे जब हम गोते लगाते है,
कभी बारिश में गिरते ओलो में,
तो कभी sandwitch कि cheese मे याद आते है,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...

दौड़ती सड़कों पर जब ख़ुद को अकेला पाते हैं,
बगल कि सीट पर हमेशा उनको ढूंढ़ते है,
ज़िंदगी से जब हारने लगते हैं,
वही उनके lessions दोहराते हैं,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...

जब भी ‘WIIIFM?’ का जवाब चाहते हैं,
‘एक आप ही तो नहीं हैं ना जनाब’ पाते हैं,
बातें उनकी हर वक़्त सुन पाते हैं,
बस वही क्यों दूर नज़र आते हैं,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...

#Devprabha_Paridhi

Wednesday, 7 June 2017

घर जाना चाहता हूँ !!!


थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ,
माँ कि गोद में जाकर बस सो जाना चाहता हूँ...
थोड़ा प्यार और थोड़ी वो बहना कि तकरार याद आती है,
आँख खुलते ही सपनों के टूटने पर, आँखें भर जाती है!!!
सबके प्यार को तरसती पल-पल मेरी निगाहें,
छुपकर एक कोने में रोते जाना चाहता हूँ...
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ |||

“कैसे हो गया मैं गुनहगार सभी का?”
बस इसी का जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते डूबकर मर जाना चाहता हूँ|
है कुछ लोग जो मरने ही नहीं देते मुझे,
उन्हें बस यही समझाना चाहता हूँ...
जब खुश नहीं है मेरे अपने,
तो फ़िर कैसे कहूँ “मैं जीना चाहता हूँ”....
ना आज कुछ और ना कल चाहता हूँ,
बस! एक बार पापा से गले लग जाना चाहता हूँ,
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ |||

“क्यों कर दिया पराया अपनों ने ही मुझे?”
यही सवाल मैं बार-बार दोहराना चाहता हूँ...
गलती नहीं थी मेरी, है सब वक़्त का फेर,
दे दो बस थोड़ी मोहलत, यही कहना चाहता हूँ...
चाहे हो कितनी तकलीफ़ें और मुश्किल, हँसकर लड़ जाउँगा मैं,
ग़र साथ नहीं हैं अपने, फ़िर कैसे जी पाउँगा मैं,
बस थोड़ा प्यार और विश्वास पाना चाहता हूँ,
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ |||

काश! वो कहें – “घर आ जा बेटा, जो होगा देख लेंगे”
ज़िंदगी इसी से जीत जाना चाहता हूँ,
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ.....
माँ कि गोद में जाकर बस सो जाना चाहता हूँ !!!
#Devprabha_Paridhi

Friday, 7 October 2016

सिर्फ तुम


बातें तुझसे हो ना हो,
बातों में मेरी *सिर्फ तुम*

महफिल में रहूँ मैं तन्हा सी,
तन्हाई में मेरी *सिर्फ तुम*

चेहरे पर रखूँ मैं कितनी हँसी,
अश्कों में मेरी *सिर्फ तुम*

ए काश कभी तू भी तो समझ,
हर दिन, हर पल, मेरी हर साँस में *सिर्फ तुम*

#Devprabha_Paridhi