वक़्त, बेवक़्त, मेरे पास है वो
हर घड़ी, हर लम्हें में आफ़ताब है वो,
कभी क़िस्सा, कभी कहानी, तो कभी क़िताब है वो,
मेरी चाहत, बहुत लाज़वाब है वो,
कभी आँखों में, कभी चेहरे पे
बिखरा नायाब है वो,
उसे भूलूँ तो भी कैसे
मेरे हर तरफ़ गुलज़ार है वो।
#Devprabha_Paridhi
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Monday, 8 April 2019
वो
Saturday, 26 January 2019
Friday, 26 October 2018
Moh Moh ke Dhage
https://youtu.be/pjM25yn427E
Monday, 30 April 2018
Dear Love
Dear Love,
Please come out from my all imagination and hold my hand in yours to protect me from this world which is like hell. I want to be safe here just like our imaginary world.
Sometimes I feel so alone here. Nobody understands me, nobody is loyal to me, everybody is trying to pull me back from my path to Dreams.
I can't trust anyone here. I need you to be with me here in real. I'm breaking down. I need your hold, your hug, and the most important thing is........YOU. 💖
Your Love
Thursday, 21 September 2017
आज फ़िर बचपन याद आया
वो बचपन, वो गैय्या, वो पीपल की छैय्या
वो यादोँ की कश्ती में, गोते लगाती मेरी नैय्या,
आज फ़िर बचपन याद आया.....
वो चिड़िया की ची-ची, वो कोयल की कूं-कूं
वो कौए का काँव-काँव,
और मैया का मेरी सुबह मुझको जगाना
आज फ़िर बचपन याद आया.....
सुबह की चाय से दिन बन जाना,
नींद में अनचाहे तैयार होना,
रोते-रोते स्कूल को
जाना,
मिलते ही यारों से सब भूल जाना,
आज फ़िर बचपन याद आया.....
स्कूल में लंच और बस छुट्टी का इंतज़ार,
दोस्तों से मिलना और मस्ती हज़ार,
घर पर मिले माँ के हाथ का खाना और प्यार बेशुमार,
आज फ़िर बचपन याद आया.....
वो दोस्तों का हर त्यौहार पर आना,
खुशियों में आकर चार-चाँद लगाना,
रोते को हँसाना, रूठे तो मनाना
हमेशा साथ रहने की वो “मम्मी की कसम” खाना,
आज फ़िर बचपन याद आया.....
ना जाने कहाँ गया,
उन स्कूल वाले दोस्तों का साया,
आँख भर आई और ख़ुद को तन्हा पाया,
मतलबी और धोखेबाजी ने दोस्ती पर से विश्वास उठाया,
तब फ़िर वही बचपन याद आया.....
#Devprabha_Paridhi
Location:India
Udaipur, Rajasthan, India
Monday, 4 September 2017
आख़िर कैसा हो वो?
प्यार पर यकीं है
मुझे, कान्हा में आस्था है मेरी...
पर कैसे करूँ
किसी के प्यार का विश्वास,
जब सबके प्यार को
है बस मतलब की आस |
मेरे ये विचार
जिन्हें पसंद नहीं आते,
वो अक्सर मुझसे
यही है पूछते-
“आख़िर कैसा हो वो
जो पसंद तुम्हेँ आये?”
मेरा सीधा सा
जवाब-
वो जो सौम्य हो,
शीतल हो...
प्रेम जिसका
अविरल हो,
नैन जिसके मुझसे
सारी बातें बयाँ कर दे,
शब्दों को कभी
कुछ कहना ना पड़े...
स्वभाव जिसका
शांतिमय हो,
वाणी जिसकी मधुमय हो,
प्रेम पे जिसके मैं वारी जाऊं
नज़रों से सबकी बचकर उसी की हो जाऊ,
क्रोध, घमंड उसकी दुनिया में ना हो,
सबके दिलों पर राज़ करने वाला स्वभाव हो
संग उसका मुझे अनुपम एहसास कराये,
ख़ुशियाँ हमारे आस पास मंडराए,
एक-दूजे की दुनिया का ख़ालीपन हम भर दे,
बस! इतनी सी ख्वाहिश वो
मेरी पूरी कर दे |
एक_बार_आना_ज़रूर!
बेवज़ह तन्हा सी ज़िन्दगी में तुम्हारा यूं वजह बनकर चुपचाप
चले आना, आज भी अच्छी तरह याद है मुझे| कब तुमने मुझपे सारे हक़ ले लिए और कब तुम
मेरा सब कुछ बनते चले गये, पता ही नहीं चला| हर बात में तुम आते गये, हर साँस में
घुलते चले गये|
ज़रूरत तो नहीं थी लेकिन
ख्वाहिश थी किसी के होने की..... हमेशा से ! और वो तुमने आकर पूरी कर दी| वक़्त
बीतता गया और तुम, मुझमें साथ-साथ और साँस-साँस एक होते चले गये|
उस वक़्त एहसास
ही नहीं हुआ कभी की हम दो है| सब कुछ एक ही लगता था|
तुम.....मैं........मैं.....तुम | बस इतना ही |
जिस्मों से नहीं, रूह से रिश्ता था हमारा....क्योंकि
जिस्मों से तो ज़रूरते पूरी होती है ना| तुम भी तो यही कहते थे |
फ़िर.......!!!
क्या हुआ था उस दिन? मेरा तो वो दिन भी अब तक ख़त्म ही नहीं
हुआ | तुम ही बता दो ना|
चले गये बस तुम...क्यों? कहाँ? किसलिए? कुछ भी नहीं बताया |
किसकी कमी थी जिसके लिए तुम्हारी तलाश मुझ पर ख़त्म नहीं हुई | क्या था जो तुम्हेँ
हमारे इस रिश्ते से ज़्यादा गहरा लगा और तुम चले गये|
“रूह की गिरफ़्त
भी कमज़ोर हो चली,
दिलों को पिरोने
की वो सुई कहाँ गयी...?”
जिस दिन तुम्हेँ पता चल जाए और तुम्हारी तलाश ख़त्म हो जाये
तो एक बार मुझे बताना ज़रूर |
मेरी ग़लतफ़हमियां ख़त्म करने के लिए ही सही एक बार आना ज़रूर|
#Devprabha_Paridhi
Thursday, 24 August 2017
ये कैसा प्यार?
प्यार ना हुआ कोई खेल हो गया,
ये तो जैसे हाथों का मैल हो गया,
एक पल में देखा अगले ही पल Tell हो गया,
फेसबुक, व्हाट्सएप पर Proposal Sell हो गया,
मैंने कहा “ऐसे कैसे ये प्रेम हो गया?
कल तो देखा और आज फोटो frame हो गया”....
अरे! प्यार ना हुआ ये तो कोई खेल हो गया,
जैसे कोई हाथों का मैल हो गया...!!!
दोस्तों कि महफ़िलों में फेमस उसका Name हो गया,
सब कहने लगे ‘ये तो लड़की के चक्कर में Insane हो गया’....
बस यूँ ही करते-करते महिना Fab हो गया,
और लड़के का Messege लड़की को Send हो गया....
“पसंद करता हूँ तुम्हें, बहुत प्यार करूँगा,
औरों कि तरह नहीं हूँ, हमेशा साथ रहूँगा,
हाँ कर दो मुझे और बन जाओ मेरी GF (गर्लफ्रेंड),
Accept कर लो प्रोपोज़ल और बना लो मुझे BF (बॉयफ्रेंड)”
प्रोपोज़ल उसका बस यूँ देखते ही देखते Breaking News हो गया,
लड़की ने किया Block, और प्रोपोज़ल Refuse हो गया,
बस ये देखकर लड़के का जोश On हो गया,
कुछ दिन को किया लड़की को बदनाम और परेशान,
फ़िर Move On हो गया...
“तू ना सही तो अगली को पटायेंगे |
Social प्रेम कि बगियाँ कहीं और खिलाएँगे ||”
यही सब तो आजकल का Trend हो गया,
और प्यार का Real में End हो गया.....
अरे! प्यार ना हुआ ये तो कोई खेल हो गया,
जैसे कोई हाथों का मैल हो गया...!!!
#Devprabha_Paridhi
Location:India
Udaipur, Rajasthan, India
Wednesday, 7 June 2017
घर जाना चाहता हूँ !!!
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ,
माँ कि गोद में जाकर बस सो जाना चाहता हूँ...
थोड़ा प्यार और थोड़ी वो बहना कि तकरार याद आती है,
आँख खुलते ही सपनों के टूटने पर, आँखें भर जाती है!!!
सबके प्यार को तरसती पल-पल मेरी निगाहें,
छुपकर एक कोने में रोते जाना चाहता हूँ...
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ |||
“कैसे हो गया मैं गुनहगार सभी का?”
बस इसी का जवाब ढूंढ़ते-ढूंढ़ते डूबकर मर जाना चाहता हूँ|
है कुछ लोग जो मरने ही नहीं देते मुझे,
उन्हें बस यही समझाना चाहता हूँ...
जब खुश नहीं है मेरे अपने,
तो फ़िर कैसे कहूँ “मैं जीना चाहता हूँ”....
ना आज कुछ और ना कल चाहता हूँ,
बस! एक बार पापा से गले लग जाना चाहता हूँ,
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ |||
“क्यों कर दिया पराया अपनों ने ही मुझे?”
यही सवाल मैं बार-बार दोहराना चाहता हूँ...
गलती नहीं थी मेरी, है सब वक़्त का फेर,
दे दो बस थोड़ी मोहलत, यही कहना चाहता हूँ...
चाहे हो कितनी तकलीफ़ें और मुश्किल, हँसकर लड़ जाउँगा मैं,
ग़र साथ नहीं हैं अपने, फ़िर कैसे जी पाउँगा मैं,
बस थोड़ा प्यार और विश्वास पाना चाहता हूँ,
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ |||
काश! वो कहें – “घर आ जा बेटा, जो होगा देख लेंगे”
ज़िंदगी इसी से जीत जाना चाहता हूँ,
थक गया हूँ बहुत घर आना चाहता हूँ.....
माँ कि गोद में जाकर बस सो जाना चाहता हूँ !!!
#Devprabha_Paridhi
Thursday, 11 May 2017
कभी तो सपनों मे आ.....
कभी तो सपनों मे आ,
मुझे भी तेरी दुनिया मे ले जा,
तेरे हाथों कि ऊँगलियों से यूँ बंध जाये मेरे हाथ,
तेरी बाँहों मे सिमटू, बस चलूं तेरे साथ-साथ,
ना तू कुछ बोले, ना मैं कुछ कहूँ...
आँखों ही आँखों मे सारा हाल पढ़ लूँ,
कभी हम चलेंगे उस नदी के किनारे भी,
जिसको आस है सागर से मिलने की आज भी,
तुझसे जुदाई के दर्द को उससे बाटूंगी,
तो कुछ सुनूँगी उसका दर्द भी,
“सुना है! दर्द बाँटने से कम होता है”
शायद कुछ कम हो जाये मेरा दर्द भी...
जो मिले तेरा साथ सपनों में ही सही,
तो ना खोलूं कभी अपनी आँखें,
बंद कर लूं तुझे पलकों मे ही
कहीं,
कभी तो सपनों मे आ,
मुझे भी तेरी दुनिया मे ले जा...
ना तू मिले, ना मेरा हो, कोई शिकवा नहीं,
बस तेरे होने के सिवा, चाहा मैंने कुछ और नहीं,
ये साँसे और ज़िंदगी सौंप दी है उसे,
जिसे पाने कि चाहत पूरी हो जाये सपनों मे ही कहीं...
कभी तो सपनों मे आ,
मुझे भी तेरी दुनिया मे ले जा...
#Devprabha_Paridhi
Friday, 21 April 2017
बिटिया मेरी, आँख का तारा
बिटिया मेरी, आँख
का तारा
जान से प्यारी, नाज़ो
से पाला.......
सादगी उसमें है,
खुशिया भी उससे
रिश्तो मे सारे
ही रिश्ते उसी से है,
ममता कि छाँव वो,
बहना का लाड़ भी,
प्यारी सी साथी
है, बेटी का रूप भी,
हर ख़ुशी, हर गम
मे, साथ रहे,
बिन तेरे तो सुने
है धरती और अम्बर भी,
बिटिया मेरी, आँख
का तारा
जान से प्यारी
है,नाज़ो से पाला..........
उसकी इक हँसी, हर
गम भुला देती
दौड़ती भागती, जब
पास वो है आती
कितनी वो शीतल
है, निश्छल और चंचल है,
उसमे वो ताकत, जो,
घर को महल कर दे,
उसने ही मुझको
जीना सिखाया
वो ही तो धुप
मे,ठंडी सी छाया
बिटिया मेरी, आँख
का तारा
जान से प्यारी
है,नाज़ो से पाला..........
ना दर्द मिले, ना
भीगे आँचल तेरा
हर दिन हो
ख़ुशियों का सवेरा,
बिटिया से ही
होगा उजियारा,
जीवन दो उसे सबसे
प्यारा,
बचा लो उसे जिसने
मारा,
लौटा दो उसे ये
जग सारा,
बिटिया मेरी, आँख
का तारा
जान से प्यारी है,नाज़ो से पाला..........
#Devprabha_Paridhi
#Devprabha_Paridhi
Location:India
Udaipur, Rajasthan, India
Thursday, 6 April 2017
Love in The Broken Heart
लगती हो तुम ऐसे जैसे,
कोई चाँद फ़लक पे हो वैसे,
आसमां भी चुपके से तुझको झुकके देखा करे,
क्या तारे भी चमका करते
देख तुझे शरमाते हुए,
तेरे नूर से ही रोशन हुए,
मेरी ज़िंदगी के हर नगमे,
........
तेरे चेहरे की वो लालिमा,
हर शाम ढले सूरज में दिखे,
देखूं मैं जब भी आईना,
मुझमें तेरा क्यों रूप दिखे,
रातों को चाँद मुझे पूछे-
“क्यों आँखे नम कर लेती हो...
दिल में जो ख़्वाब पिरोये है...
क्यों उन्हें टूटने देती हो...
इस प्रेम मिलन की बेला में...
मुझको भी चाँदनी मिलती है...
तेरा तो प्यार अनूठा है...
फ़िर क्यों वो तुझसे रूठा है...”
कुछ सोचके, उसको समझाऊँ,
“ऐ चाँद तुझे क्या बतलाऊँ...
किस्मत ने खेल जो खेला है..
उस प्यार को जितना प्यार किया...
उतना ही दर्द भी झेला है...
रूठा तो नहीं है वो मुझसे...
रूठी अब मैं ही हूँ खुदसे...
क्यों प्यार किया मैंने इतना...
जब दूर उसे जाना ही था...
तेरी रातों के सपनों जैसे...
मेरे ख्वाबों को भी टूट जाना था...
हर रात तुझे एक आस रहे...
कि चाँदनी तुझसे मिलती है...
मेरा तो अब कोई ख़्वाब नहीं...
बस मेरे सपने और तन्हाई है...
..............
हँसती तो होगी हर महफ़िल मुझपे,
क्या देखो इसका हाल हुआ,
बड़ी प्यार की माला जपती थी,
प्यार में ही सब बर्बाद हुआ,
इतने पे भी यूं सितम देखो,
वो प्यार हमारा पूछे हमसे,
‘कैसे है हाल दीवानों के,
कोई खबर नहीं आई कबसे’
..............
वो क्या समझेंगे हाल मेरा,
अब उम्मीद नहीं ये हमें उनसे,
एक दिन याद तो आयेगी,
जब बिछड़ेंगे हम भी उनसे,
..............
उनका कुछ दोष नहीं यारों,
गलती शायद मैंने ही की,
रोका होता ख़ुद को पहले,
तो शायद मैं भी खुश होती,
अब सोच लिया है मैंने भी,
इन सबसे दूर चले जाना,
ख़ुद को ही है ख़ुद में पाना,
बस ख़ुद को ही है खो देना...!!!
#Devprabha_Paridhi
#Devprabha_Paridhi
Friday, 2 December 2016
Monday, 28 November 2016
मौसम आ गया
मौसमें इश्क में खोने का मौसम आ गया,
तेरी यादों में डूबने का मौसम आ गया।।
जरा ठहरो मैं राह के काॅटे चुन के अलग कर लूॅ,
शायद अब कलियों के खिलने का मौसम आ गया।।
कुछ जरा नजरों की धुन्ध छाॅट लेने दो,
फिर से सावन बरसने का मौसम आ गया।।
पुराने जख्मों के भर जाने से खुश ना हो एहले चमन,
अब नये-नये जख्मों के मिलने का मौसम आ गया।।
मंजिल सामने दिखती है तो क्या फर्क पडता है,
हमसफर के मोड मुडने का मौसम आ गया।।
Written by-
Devprakash Prajapati
Monday, 7 November 2016
प्यार
ये प्यार का खेल निराला है,
हमें कभी समझ ना आने वाला है,
कभी प्यार पे यकीं दिलाये वो,
कभी ख़ुद ही छोड़ चला जाये वो,
जब कहे कोई उन्हें बेवफ़ा,
फ़िर लौट कही से आ जाये वो,
क्या कहूं इसे...ये तू ही बता,
गर है प्यार तुझे तो तू भी जता,
समझाना मुझको तो आता नहीं,
क्या मेरे आँसू तुझे दिखते
नहीं,
चाहा है
तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा,
ए काश! तू फ़िर
से लौट के आ,
बंधन सारे अब
तोड़ के आ,
इस बार ना तुझे जाने दूंगी,
तुझमें ख़ुद को
मैं पा लूँगी,
मैंने माँग लिया है रब से तुझे,
हम जनम जनम बस प्यार करे...!!!
#Devprabha_Paridhi
Friday, 7 October 2016
Wednesday, 13 April 2016
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