Thursday, 7 July 2016


आओ एक ईद मनाते हैं..

कुछ सेवेयां तुम ले आओ...
कुछ उसमे दूध हम मिलाते हैं...
आओ एक ईद मानते हैं...
एक दिया तुम रख दो मंदिर में...
एक शमां हम मस्जिद में जलाते हैं...
आओ एक ईद मनाते हैं...
क्यों तेरा मेरा कर लड़ते रहे अब तक ..
शाहे शरीर है... बे- गेरत ये सब को बताते हैं...
आओ एक मुक्कमल ईद मनाते हैं...
बहुत हो चुका ..धर्म के नाम पर इंसानियत का बंटवारा..
अब एक हो कर सारी दुनियां को ताकत दिखाते हैं...
आओ सब मिल कर एक ईद मनाते हैं....
आओ उन्हें हारा हुआ सिकंदर...
और कब्र में दफ़न अकबर महान दिखाते हैं.....
जो कहते थे कभी की हमारे दम से है दुनियां..
आओ सब मिल कर एक ईद मनाते हैं...
ईद की सभी को राम राम....
सारी दीवारें...तेरा मेरा की छोड़ कर दूध और सेवियों से एक हो जाते हैं....
आओ मिल कर एक ईद मनाते हैं....

No comments:

Post a Comment