Monday, 7 November 2016

प्यार


ये प्यार का खेल निराला है,
हमें कभी समझ ना आने वाला है,
कभी प्यार पे यकीं दिलाये वो,
कभी ख़ुद ही छोड़ चला जाये वो,
जब कहे कोई उन्हें बेवफ़ा,
फ़िर लौट कही से आ जाये वो,
क्या कहूं इसे...ये तू ही बता,
गर है प्यार तुझे तो तू भी जता,
समझाना मुझको तो आता नहीं,
क्या मेरे आँसू तुझे दिखते नहीं,
चाहा है तुम्हें ख़ुद से ज़्यादा,
ए काश! तू फ़िर से लौट के आ,
बंधन सारे अब तोड़ के आ,
इस बार ना तुझे जाने दूंगी,
तुझमें ख़ुद को मैं पा लूँगी,
मैंने माँग लिया है रब से तुझे,
हम जनम जनम बस प्यार करे...!!!
#Devprabha_Paridhi

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