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Friday, 3 January 2020

Help Me !



Help Me To Come Out From The Depression!

Saturday, 2 February 2019

बेगैरत



हमारे कुछ राज़...
अपने सीने में दफ़न कर लो,
की शायद फ़िर नींद ना आये तुम्हें,
ये जो दर्द देकर...
बेगैरत से फिरते हो तुम,
कि हमारे देर तक जागने की वज़ह भी तुम ही हो!

#Devprabha_Paridhi

Saturday, 2 December 2017

माँ का दर्द

जब वो कुछ कह नहीं पाती... नजरें चुराती है,
दर्द का समंदर अपने अन्दर छुपाती है,
वो होंठों से मुस्कुराकर सबको दिखाती है,
ना जाने कैसे वो इतना कुछ सह जाती है,
छुपकर सबसे वो अपने आँसू बहाती है,
तिल-तिल कर मिटते अपने वज़ूद को वो,
आँखों पर चश्मा लिए अपने बच्चों में पाती है,
नामुमकिन है उसको इस कदर पूरा बयाँ करना,
इसीलिए वो मेरी माँ कहलाती है....

पति, जिससे थी प्यार और विश्वास की चाहत,
उसी से हमेशा ताने और अपमान पाती है,
बच्चों को ममता की छाँव में पाला,
अब उन्हीं से हर बात पर दुत्कार खाती है,
टूटकर भी हर तरह से वो अपना फ़र्ज निभाती है,
इसीलिए वो मेरी माँ कहलाती है....

माँ मेरी सब पर बस प्यार लुटाती है,
लाख दुःखों को सहकर भी उसके लबों पर उफ़ तक नहीं आती है,
देखकर उसको हर वक़्त मेरा दिल भर आता है,
क्या ईश्वर इस रूप में भी धरती पर आता है,
उम्र मेरी भी सारी मेरी माँ को लग जाये,
जीवन मेरा पूरा माँ के आँचल में समाये,
जिंदगी मेरी ये मुकम्मल हो जाती है,
माँ का मेरी गर एक अंश भी हो पाती है,
माँ ही तो मुझको साकार बनाती है,
इसीलिए वो मेरी माँ कहलाती है....

#Devprabha_Paridhi

Monday, 4 September 2017

एक_बार_आना_ज़रूर!

बेवज़ह तन्हा सी ज़िन्दगी में तुम्हारा यूं वजह बनकर चुपचाप चले आना, आज भी अच्छी तरह याद है मुझे| कब तुमने मुझपे सारे हक़ ले लिए और कब तुम मेरा सब कुछ बनते चले गये, पता ही नहीं चला| हर बात में तुम आते गये, हर साँस में घुलते चले गये|
ज़रूरत तो नहीं थी लेकिन ख्वाहिश थी किसी के होने की..... हमेशा से ! और वो तुमने आकर पूरी कर दी| वक़्त बीतता गया और तुम, मुझमें साथ-साथ और साँस-साँस एक होते चले गये|
      उस वक़्त एहसास ही नहीं हुआ कभी की हम दो है| सब कुछ एक ही लगता था|
तुम.....मैं........मैं.....तुम | बस इतना ही |
जिस्मों से नहीं, रूह से रिश्ता था हमारा....क्योंकि जिस्मों से तो ज़रूरते पूरी होती है ना| तुम भी तो यही कहते थे |
फ़िर.......!!!
क्या हुआ था उस दिन? मेरा तो वो दिन भी अब तक ख़त्म ही नहीं हुआ | तुम ही बता दो ना|
चले गये बस तुम...क्यों? कहाँ? किसलिए? कुछ भी नहीं बताया | किसकी कमी थी जिसके लिए तुम्हारी तलाश मुझ पर ख़त्म नहीं हुई | क्या था जो तुम्हेँ हमारे इस रिश्ते से ज़्यादा गहरा लगा और तुम चले गये|
“रूह की गिरफ़्त भी कमज़ोर हो चली,
दिलों को पिरोने की वो सुई कहाँ गयी...?”
जिस दिन तुम्हेँ पता चल जाए और तुम्हारी तलाश ख़त्म हो जाये तो एक बार मुझे बताना ज़रूर |
मेरी ग़लतफ़हमियां ख़त्म करने के लिए ही सही एक बार आना ज़रूर|

#Devprabha_Paridhi

Monday, 28 November 2016

मौसम आ गया


मौसमें इश्क में खोने का मौसम आ गया,

तेरी यादों में डूबने का मौसम आ गया।।

जरा ठहरो मैं राह के काॅटे चुन के अलग कर लूॅ,

शायद अब कलियों के खिलने का मौसम आ गया।।

कुछ जरा नजरों की धुन्ध छाॅट लेने दो,

फिर से सावन बरसने का मौसम आ गया।।

पुराने जख्मों के भर जाने से खुश ना हो एहले चमन,

अब नये-नये जख्मों के मिलने का मौसम आ गया।।

मंजिल सामने दिखती है तो क्या फर्क पडता है,

हमसफर के मोड मुडने का मौसम आ गया।।

Written by-

Devprakash Prajapati

Monday, 11 April 2016

#Love - Lies in Silence_3


Painful Love

कितना अजीब दर्द है मेरी ज़िंदगी का,
हम उन्हें पा ना सके,जिन्हें खोने का डर हमें सताया जा रहा है...!!!
Author - RV Singh

Sunday, 10 April 2016

#Love - Lies in Silence_2


दूर ही सही,एहसास तो है उन्हें मेरे दर्द का,
अब तो ये दर्द भी मेरे लिए ज़रिया है ख़ुशी का....
Author - RV Singh