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Saturday, 24 March 2018
Thursday, 21 September 2017
काश! तुम समझ पाते...
काश! तुम ये समझ पाते,
काश! तुम वो समझ जाते...
पर तुम ना समझ पाये,
फ़िर भी ठीक ही है सब कुछ,
जो तुम सब समझ जाते,
तो फ़िर यूं जी भी ना
पाते,
और शायद.....
तब मैं भी ना जी पाती
तुम्हारे बिन,
ये जो तन्हाई यूं आराम से
कटती है अकेले बैठकर,
वो बिन तुम्हारे फ़िर इतनी
सरल तो ना होती,
फ़िर....
कुछ यादें, वो बातें, कुछ
रस्में और वादे,
सब घेरते मुझे हर दम,
और छीन लेते मुझसे मेरी
तन्हाई,
और हर इक़ गम...
पर जो तुम ना समझ पाये,
तो ही ठीक है सब कुछ....
काश! तुम ये समझ पाते,
काश! तुम वो समझ जाते...
#Devprabha_Paridhi
Saturday, 1 July 2017
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
This time poem is dedicated to my special friend Arun Ji ❤❤❤
अक्सर कभी
तन्हाई में वो बहुत याद आते है,
यांदो के
भँवर मे जब हम गोते लगाते है,
कभी बारिश में
गिरते ओलो में,
तो कभी
sandwitch कि cheese मे याद आते है,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
दौड़ती सड़कों पर जब ख़ुद को अकेला पाते हैं,
बगल कि सीट पर हमेशा उनको ढूंढ़ते है,
ज़िंदगी से जब हारने लगते हैं,
वही उनके lessions दोहराते हैं,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
जब भी ‘WIIIFM?’ का जवाब चाहते हैं,
‘एक आप ही तो नहीं हैं ना जनाब’ पाते हैं,
बातें उनकी हर वक़्त सुन पाते हैं,
बस वही
क्यों दूर नज़र आते हैं,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
#Devprabha_Paridhi
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