This time poem is dedicated to my special friend Arun Ji ❤❤❤
अक्सर कभी
तन्हाई में वो बहुत याद आते है,
यांदो के
भँवर मे जब हम गोते लगाते है,
कभी बारिश में
गिरते ओलो में,
तो कभी
sandwitch कि cheese मे याद आते है,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
दौड़ती सड़कों पर जब ख़ुद को अकेला पाते हैं,
बगल कि सीट पर हमेशा उनको ढूंढ़ते है,
ज़िंदगी से जब हारने लगते हैं,
वही उनके lessions दोहराते हैं,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
जब भी ‘WIIIFM?’ का जवाब चाहते हैं,
‘एक आप ही तो नहीं हैं ना जनाब’ पाते हैं,
बातें उनकी हर वक़्त सुन पाते हैं,
बस वही
क्यों दूर नज़र आते हैं,
कभी कभी वो बहुत याद आते है...
#Devprabha_Paridhi

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