मौसमें इश्क में खोने का मौसम आ गया,
तेरी यादों में डूबने का मौसम आ गया।।
जरा ठहरो मैं राह के काॅटे चुन के अलग कर लूॅ,
शायद अब कलियों के खिलने का मौसम आ गया।।
कुछ जरा नजरों की धुन्ध छाॅट लेने दो,
फिर से सावन बरसने का मौसम आ गया।।
पुराने जख्मों के भर जाने से खुश ना हो एहले चमन,
अब नये-नये जख्मों के मिलने का मौसम आ गया।।
मंजिल सामने दिखती है तो क्या फर्क पडता है,
हमसफर के मोड मुडने का मौसम आ गया।।
Written by-
Devprakash Prajapati


