लगती हो तुम ऐसे जैसे,
कोई चाँद फ़लक पे हो वैसे,
आसमां भी चुपके से तुझको झुकके देखा करे,
क्या तारे भी चमका करते
देख तुझे शरमाते हुए,
तेरे नूर से ही रोशन हुए,
मेरी ज़िंदगी के हर नगमे,
........
तेरे चेहरे की वो लालिमा,
हर शाम ढले सूरज में दिखे,
देखूं मैं जब भी आईना,
मुझमें तेरा क्यों रूप दिखे,
रातों को चाँद मुझे पूछे-
“क्यों आँखे नम कर लेती हो...
दिल में जो ख़्वाब पिरोये है...
क्यों उन्हें टूटने देती हो...
इस प्रेम मिलन की बेला में...
मुझको भी चाँदनी मिलती है...
तेरा तो प्यार अनूठा है...
फ़िर क्यों वो तुझसे रूठा है...”
कुछ सोचके, उसको समझाऊँ,
“ऐ चाँद तुझे क्या बतलाऊँ...
किस्मत ने खेल जो खेला है..
उस प्यार को जितना प्यार किया...
उतना ही दर्द भी झेला है...
रूठा तो नहीं है वो मुझसे...
रूठी अब मैं ही हूँ खुदसे...
क्यों प्यार किया मैंने इतना...
जब दूर उसे जाना ही था...
तेरी रातों के सपनों जैसे...
मेरे ख्वाबों को भी टूट जाना था...
हर रात तुझे एक आस रहे...
कि चाँदनी तुझसे मिलती है...
मेरा तो अब कोई ख़्वाब नहीं...
बस मेरे सपने और तन्हाई है...
..............
हँसती तो होगी हर महफ़िल मुझपे,
क्या देखो इसका हाल हुआ,
बड़ी प्यार की माला जपती थी,
प्यार में ही सब बर्बाद हुआ,
इतने पे भी यूं सितम देखो,
वो प्यार हमारा पूछे हमसे,
‘कैसे है हाल दीवानों के,
कोई खबर नहीं आई कबसे’
..............
वो क्या समझेंगे हाल मेरा,
अब उम्मीद नहीं ये हमें उनसे,
एक दिन याद तो आयेगी,
जब बिछड़ेंगे हम भी उनसे,
..............
उनका कुछ दोष नहीं यारों,
गलती शायद मैंने ही की,
रोका होता ख़ुद को पहले,
तो शायद मैं भी खुश होती,
अब सोच लिया है मैंने भी,
इन सबसे दूर चले जाना,
ख़ुद को ही है ख़ुद में पाना,
बस ख़ुद को ही है खो देना...!!!
#Devprabha_Paridhi
#Devprabha_Paridhi

बहुत अच्छे
ReplyDeleteये संग-दिलों की दुनिया है,
ReplyDeleteयहाँ सँभल के चलना दोस्त,
यहाँ पलकों पे बिठाया जाता है,
नज़रों से गिराने के लिए।