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Sunday, 24 April 2016
Wednesday, 13 April 2016
Tuesday, 12 April 2016
Monday, 11 April 2016
Sunday, 10 April 2016
बैठ जाती हूं मिट्टी पे अक्सर

बैठ जाती हूं मिट्टी पे अक्सर...
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है..
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।।
ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है पर सच कहती हूँ
मुझमे कोई फरेब नहीं है
जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि एक मुद्दत
से मैंने
न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!.
एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली..
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!
सोचती थी घर बना कर बैठुंगी सुकून से..
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!
सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब....
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |
शौक तो माँ-बाप के पैसो से पूरे होते हैं,
अपने पैसो से तो बस ज़रूरतें ही पूरी हो पाती हैं..
जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है..
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है..
कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते..
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते..
लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..
"खुश हूँ और सबको खुश रखती हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करती हूँ..
मालूम हे कोई मोल नहीं मेरा,
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखती हूँ...!!!
Saturday, 9 April 2016
प्रेमगीत
एक दुसरे से प्रेम करो ,
लेकिन प्रेम को बांधो मत
उसे दोनों की आत्माओं के
किनारों के बीच उमड़ता समंदर बनाओ |
एक दुसरे का प्याला भरो,
मगर एक ही प्याले से मत पियो,
एक दुसरे को अपना भोजन
दो, मगर एक ही थाली में मत खाओ |
एक साथ नाचो-गाओ और आनंद
मनाओ, मगर एक दुसरे को अलग रहने दो,
जैसेकि वीणा के तार अलग
होते हुए भी एक ही संगीत से गूंज उठते हैं |
अपना ह्रदय दो, लेकिन
एक-दुसरे की कैद में रखने के लिए नहीं,
क्योंकि तुम्हारा ह्रदय
सिर्फ ज़िन्दगी के हाथ संभाल सकते है |
और साथ खड़े होओ, लेकिन
साथ में बेहद करीब नहीं,
जिस तरह मंदिर के स्तंभ
अलग होते हुए साथ खड़े होते है |
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