Sunday, 24 April 2016

ज़ुनूनी ख्वाहिशें


   ख्वाहिशें हथेली पर लेकर घुमे हो कभी,
हर पल ज़ुनून की आग में जलना होता है,
आँखों से नींद का रिश्ता टूटा है कभी,
रात भर सपनों को जीना होता है,
कोई सुन ना ले, कि पगली कहेगा,
और ज़माने ने कुछ किया है कभी...!!!
-DJ Paridhi

Wednesday, 13 April 2016

तेरी यही बात तो मेरे दिल को भाती है...!!!

         
तेरी यही बात तो मेरे दिल को भाती है,
जो तुझे औरों से अलग बनाती है,
दिल में है तेरे प्यार का सागर,
होंठों पे तेरी मुस्कान का गागर,
हर पल बस तेरा ही दीदार हो मुझे,
अब तो हर रोज़ तू मेरे सपनों में आती है,
तेरी यही बात तो मेरे दिल को भाती है,
जो तुझे औरों से अलग बनाती है….!!!
-DJ Paridhi

Tuesday, 12 April 2016

Metro Morning - renewing relationships

#Love - Lies in Silence_4

Love Lies in Silence

इतना भी नाम ना कर मेरा तेरे दीवानों में,
की जिस गली से गुज़रू...
तेरे नाम से लोग मुझे पहचानने लगें...!!!
Author - RV Singh

Monday, 11 April 2016

#Love - Lies in Silence_3


Painful Love

कितना अजीब दर्द है मेरी ज़िंदगी का,
हम उन्हें पा ना सके,जिन्हें खोने का डर हमें सताया जा रहा है...!!!
Author - RV Singh

Sunday, 10 April 2016

#Love - Lies in Silence_2


दूर ही सही,एहसास तो है उन्हें मेरे दर्द का,
अब तो ये दर्द भी मेरे लिए ज़रिया है ख़ुशी का....
Author - RV Singh

#Love - Lies in Silence_1


लिख दूँ किताब तेरे लिए ए दोस्त,
पर दिल नहीं चाहता तुझे कोई और पढ़े मेरे सिवा... 

Author - RV Singh

बैठ जाती हूं मिट्टी पे अक्सर


























बैठ जाती हूं मिट्टी पे अक्सर...
क्योंकि मुझे अपनी औकात अच्छी लगती है..
मैंने समंदर से सीखा है जीने का सलीक़ा,
चुपचाप से बहना और अपनी मौज में रहना ।।
ऐसा नहीं है कि मुझमें कोई ऐब नहीं है पर सच कहती हूँ
मुझमे कोई फरेब नहीं है
जल जाते हैं मेरे अंदाज़ से मेरे दुश्मन क्यूंकि एक मुद्दत
से मैंने
न मोहब्बत बदली और न दोस्त बदले .!!.
एक घड़ी ख़रीदकर हाथ मे क्या बाँध ली..
वक़्त पीछे ही पड़ गया मेरे..!!
सोचती थी घर बना कर बैठुंगी सुकून से..
पर घर की ज़रूरतों ने मुसाफ़िर बना डाला !!!
सुकून की बात मत कर ऐ ग़ालिब....
बचपन वाला 'इतवार' अब नहीं आता |
शौक तो माँ-बाप के पैसो से पूरे होते हैं,
अपने पैसो से तो बस ज़रूरतें ही पूरी हो पाती हैं..
जीवन की भाग-दौड़ में -
क्यूँ वक़्त के साथ रंगत खो जाती है ?
हँसती-खेलती ज़िन्दगी भी आम हो जाती है..
एक सवेरा था जब हँस कर उठते थे हम
और
आज कई बार
बिना मुस्कुराये ही शाम हो जाती है..
कितने दूर निकल गए,
रिश्तो को निभाते निभाते..
खुद को खो दिया हमने,
अपनों को पाते पाते..
लोग कहते है हम मुस्कुराते बहोत है,
और हम थक गए दर्द छुपाते छुपाते..
"
खुश हूँ और सबको खुश रखती हूँ,
लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह
करती हूँ..
मालूम हे कोई मोल नहीं मेरा,
फिर भी,
कुछ अनमोल लोगो से
रिश्ता रखती हूँ...!!!


Saturday, 9 April 2016

प्रेमगीत

एक दुसरे से प्रेम करो , लेकिन प्रेम को बांधो मत

उसे दोनों की आत्माओं के किनारों के बीच उमड़ता समंदर बनाओ |

एक दुसरे का प्याला भरो, मगर एक ही प्याले से मत पियो,

एक दुसरे को अपना भोजन दो, मगर एक ही थाली में मत खाओ |

एक साथ नाचो-गाओ और आनंद मनाओ, मगर एक दुसरे को अलग रहने दो,

जैसेकि वीणा के तार अलग होते हुए भी एक ही संगीत से गूंज उठते हैं |

अपना ह्रदय दो, लेकिन एक-दुसरे की कैद में रखने के लिए नहीं,

क्योंकि तुम्हारा ह्रदय सिर्फ ज़िन्दगी के हाथ संभाल सकते है |

और साथ खड़े होओ, लेकिन साथ में बेहद करीब नहीं,

जिस तरह मंदिर के स्तंभ अलग होते हुए साथ खड़े होते है |

बलूत का वृक्ष और सरू एक दुसरे की छाया में नहीं बढ़ सकते |


Love