एक दुसरे से प्रेम करो ,
लेकिन प्रेम को बांधो मत
उसे दोनों की आत्माओं के
किनारों के बीच उमड़ता समंदर बनाओ |
एक दुसरे का प्याला भरो,
मगर एक ही प्याले से मत पियो,
एक दुसरे को अपना भोजन
दो, मगर एक ही थाली में मत खाओ |
एक साथ नाचो-गाओ और आनंद
मनाओ, मगर एक दुसरे को अलग रहने दो,
जैसेकि वीणा के तार अलग
होते हुए भी एक ही संगीत से गूंज उठते हैं |
अपना ह्रदय दो, लेकिन
एक-दुसरे की कैद में रखने के लिए नहीं,
क्योंकि तुम्हारा ह्रदय
सिर्फ ज़िन्दगी के हाथ संभाल सकते है |
और साथ खड़े होओ, लेकिन
साथ में बेहद करीब नहीं,
जिस तरह मंदिर के स्तंभ
अलग होते हुए साथ खड़े होते है |

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