Saturday, 9 April 2016

प्रेमगीत

एक दुसरे से प्रेम करो , लेकिन प्रेम को बांधो मत

उसे दोनों की आत्माओं के किनारों के बीच उमड़ता समंदर बनाओ |

एक दुसरे का प्याला भरो, मगर एक ही प्याले से मत पियो,

एक दुसरे को अपना भोजन दो, मगर एक ही थाली में मत खाओ |

एक साथ नाचो-गाओ और आनंद मनाओ, मगर एक दुसरे को अलग रहने दो,

जैसेकि वीणा के तार अलग होते हुए भी एक ही संगीत से गूंज उठते हैं |

अपना ह्रदय दो, लेकिन एक-दुसरे की कैद में रखने के लिए नहीं,

क्योंकि तुम्हारा ह्रदय सिर्फ ज़िन्दगी के हाथ संभाल सकते है |

और साथ खड़े होओ, लेकिन साथ में बेहद करीब नहीं,

जिस तरह मंदिर के स्तंभ अलग होते हुए साथ खड़े होते है |

बलूत का वृक्ष और सरू एक दुसरे की छाया में नहीं बढ़ सकते |


Love

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