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Monday, 27 August 2018

अच्छा होता कि राहुल गांधी 1984 के दंगे के लिए माफी मांग लेते

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 1984 के सिख विरोधी दंगों में कांग्रेस की भूमिका से इंकार किया हैं। उन्होंने उस हिंसा को एक बड़ी त्रासदी बताया और उसके पीड़ितों के साथ सहानुभूति जताते हुए कहा कि दोषियों को कानून के मुताबिक दंडित किया जाना चाहिए।

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Sunday, 26 August 2018

आपके फेसबुक प्रोफाइल पर राजनीतिक विज्ञापन

फेसबुक पर राजनीतिक विज्ञापनों के लिए प्रोपब्लिका नाम की एक कंपनी ने नए-नए टूल्स ईजाद किए हैं। इसका उद्देश्य ही है, फेसबुक पर लोगों की रुचि के अनुसार राजनीतिक विज्ञापनों को पोस्ट करना। प्रोपब्लिका के इस प्रोजेक्ट में एबीसी न्यूज नेटवर्क भी हिस्सेदार ...

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अमेरिकी दृढ़ आर्थिक नीति के सामने बिखरते राष्ट्र

तीन सप्ताह पहले 4 अगस्त के अंक में इस लेखक ने अपने लेख में चीन और अमेरिका के बीच आरंभ हुए आर्थिक युद्ध की वर्तमान स्थिति और परिणामों के बारे में पाठकों को अवगत कराया था।

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Saturday, 25 August 2018

कविता : युवा समाज को बदलते जा रहे हैं

दिन हो, रात हो अब युवा हिन्द के करते आराम नहीं, समाज बदल रहा है युवा, व्याकुलता का अब काम नहीं, भारत माता की वेदी पर निज प्राणों का उपहार लाये हैं...

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Friday, 24 August 2018

रक्षाबंधन की 5 ऐतिहासिक घटनाएं, जिन्हें आज भी याद करते हैं लोग...

रक्षाबंधन भाई-बहन के स्नेह और उल्लास का पर्व माना जाता है। भारत के प्रमुख पर्वों में राखी भी प्रमुखता से मनाई जाती है। यह एकमात्र ऐसा पर्व है, जिस दिन बहनों का अत्यधिक महत्व होता है। देश के हर क्षेत्र में यह त्योहार मनाया जाता है, लेकिन उसे मनाने का ...

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Thursday, 23 August 2018

हिन्दी कविता : तुम बदल गए

तुम बदल गए। थामकर हाथ तुम्हारा, चल पडी थी सपनों में रंग भर के उम्मीद के पंख लगाकर,

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बहुत खास होता है भाई-बहन का प्यार, चाहिए बहन को 3 उपहार, विश्वास, सहारा और प्यार

यह त्योहार तभी सही मायनों में खूबसूरत होगा जब बहन का सम्मान और भाई का चरित्र दोनों कायम रहे। यह रेशमी धागा सिर्फ धागा नहीं है। राखी की इस महीन डोरी में विश्वास, सहारा और प्यार गुंफित हैं और कलाई पर बंधकर यह डोरी प्रतिदान में भी यही तीन अनुभूतियां ...

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पुस्तक समीक्षा : 'आचमन, प्रेम जल से' प्रेमानुभूतियों का समंदर है

'आचमन, प्रेम जल से' काव्य संग्रह की रचनाकार ई. अर्चना नायडू हैं। यह इनका द्वितीय काव्य संग्रह है। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में इनकी रचनाओं का प्रकाशन लगातार होता रहता है।

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Wednesday, 22 August 2018

प्यार, विश्वास, मुस्कान, स्वतंत्रता और क्षमा की राखियां बांधें अपने भाई को...

इस मोहक मनभावन त्योहार पर इस बार बांधें कुछ ऐसी राखियों को जो हर भाई-बहन के जीवन जीने का अंदाज बदल दें: यह राखी है प्यार, विश्वास, मुस्कान, स्वतंत्रता और क्षमा की।

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व्यंग्य : बकरे, जिनके पास रहने से दूर होता है अस्थमा

ईद के मौके पर बकरे की बात होना तो लाजमी है। लेकिन क्या कभी इस भोले प्राणी की तारीफ भी की है आपने...? क्यों भई, ईद पर कुर्बानी देने वाला ये नाचीज, चटपटे स्वाद के इतर भी तो तारीफ का हकदार है...वो भी तब, जब ये आपकी अस्थमा की समस्या का इलाज तक करता है।

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उपवास के आश्चर्यजनक फायदे माने वैज्ञानिकों ने, पढ़ें चौंका देने वाली शोधपरक जानकारी

विज्ञान-जगत में कुछ ऐसे वैज्ञानिक भी होते हैं, विशेषकर चिकित्सा विज्ञान में, जो आज के ज्ञान को ही अंतिम विज्ञान नहीं मान लेते, ऐसे ही वैज्ञानिकों की कृपा से योग-ध्यान अब कोई अज्ञान नहीं रहा। योग-ध्यान के समान ही उपवास भी एक ऐसा स्वास्थ्य- विज्ञान ...

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Tuesday, 21 August 2018

रामचन्द्र सिंहदेव : विचारों की दृढ़ता और अभिव्यक्ति में बेबाक

राजनीतिज्ञ, लेखक और चिंतक रामचन्द्र सिंहदेव का निधन पिछले दिनों रायपुर में हो गया। डॉ. रामचन्द्र सिंहदेव कोरिया राजपरिवार के राजा थे और 'कोरिया कुमार' नाम से भी जाने जाते थे। उन्हें अर्थशास्त्र का जानकार माना जाता था। इससे पहले अविभाजित मध्यप्रदेश ...

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थोड़ी-सी बारिश की बड़ी-सी आफत

देश के कई शहरों में बारिश ने कोहराम मचाते हुए सामान्य जनजीवन को बड़ी बुरी तरह से प्रभावित कर रखा है और ये बात सिर्फ किसी एक बारिश के मौसम की नहीं है। ह

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केरल से खास : यहां हर जान की कीमत है, बच्चे, बुजुर्ग और बीमार के साथ बचाए जा रहे हैं जानवर भी...

प्राकृतिक आपदाएं चेहरा, धर्म, स्थिति-परिस्थितियों को नहीं देखती...बस कहर बनकर बरसती हैं और छीन ले जाती है चैन, सुकून, खुशियां, सिर से छत और कई जिंदगियां...। कहते हैं जब मानवता अपना अस्तित्व छोड़ती है, तो प्रकृति कहर बन जाती है... लेकिन केरल के हालात ...

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इस्मत चुगताई : बिंदास और बेबाक रचनाकार

ऐसा नहीं कि इस्मत के अफसानों में सिर्फ महिला मुद्दे ही थे। उन्होंने समाज की कुरीतियों, व्यवस्थाओं और अन्य पात्रों को भी बखूबी पेश किया। यही नहीं वह अफसानों में करारा व्यंग्य भी करती थीं जो उनकी कहानियों की रोचकता और सार्थकता को बढ़ा देता है।

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