Saturday, 25 August 2018

कविता : युवा समाज को बदलते जा रहे हैं

दिन हो, रात हो अब युवा हिन्द के करते आराम नहीं, समाज बदल रहा है युवा, व्याकुलता का अब काम नहीं, भारत माता की वेदी पर निज प्राणों का उपहार लाये हैं...

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