जब वो कुछ कह
नहीं पाती... नजरें चुराती है,
दर्द का समंदर अपने
अन्दर छुपाती है,
वो होंठों से
मुस्कुराकर सबको दिखाती है,
ना जाने कैसे वो
इतना कुछ सह जाती है,
छुपकर सबसे वो
अपने आँसू बहाती है,
तिल-तिल कर मिटते
अपने वज़ूद को वो,
आँखों पर चश्मा
लिए अपने बच्चों में पाती है,
नामुमकिन है उसको
इस कदर पूरा बयाँ करना,
इसीलिए वो मेरी
माँ कहलाती है....
पति, जिससे थी
प्यार और विश्वास की चाहत,
उसी से हमेशा
ताने और अपमान पाती है,
बच्चों को ममता की
छाँव में पाला,
अब उन्हीं से हर
बात पर दुत्कार खाती है,
टूटकर भी हर तरह
से वो अपना फ़र्ज निभाती है,
इसीलिए वो मेरी
माँ कहलाती है....
माँ मेरी सब पर बस
प्यार लुटाती है,
लाख दुःखों को सहकर भी
उसके लबों पर उफ़ तक नहीं आती है,
देखकर उसको हर
वक़्त मेरा दिल भर आता है,
क्या ईश्वर इस
रूप में भी धरती पर आता है,
उम्र मेरी भी
सारी मेरी माँ को लग जाये,
जीवन मेरा पूरा
माँ के आँचल में समाये,
जिंदगी मेरी ये
मुकम्मल हो जाती है,
माँ का मेरी गर
एक अंश भी हो पाती है,
माँ ही तो मुझको
साकार बनाती है,
इसीलिए वो मेरी
माँ कहलाती है....
#Devprabha_Paridhi

Superb dear👌
ReplyDeleteSuperb composition devprabha... Really very touchy
ReplyDeleteSuperb composition devprabha... Really very touchy
ReplyDeletevery nice !!
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