Thursday, 11 May 2017

कभी तो सपनों मे आ.....



कभी तो सपनों मे आ,
मुझे भी तेरी दुनिया मे ले जा,
तेरे हाथों कि ऊँगलियों से यूँ बंध जाये मेरे हाथ,
तेरी बाँहों मे सिमटू, बस चलूं तेरे साथ-साथ,
ना तू कुछ बोले, ना मैं कुछ कहूँ...
आँखों ही आँखों मे सारा हाल पढ़ लूँ,

कभी हम चलेंगे उस नदी के किनारे भी,
जिसको आस है सागर से मिलने की आज भी,
तुझसे जुदाई के दर्द को उससे बाटूंगी,
तो कुछ सुनूँगी उसका दर्द भी,
“सुना है! दर्द बाँटने से कम होता है”
शायद कुछ कम हो जाये मेरा दर्द भी...
जो मिले तेरा साथ सपनों में ही सही,
तो ना खोलूं कभी अपनी आँखें,
बंद कर लूं तुझे पलकों मे ही कहीं,
कभी तो सपनों मे आ,
मुझे भी तेरी दुनिया मे ले जा...

ना तू मिले, ना मेरा हो, कोई शिकवा नहीं,
बस तेरे होने के सिवा, चाहा मैंने कुछ और नहीं,
ये साँसे और ज़िंदगी सौंप दी है उसे,
जिसे पाने कि चाहत पूरी हो जाये सपनों मे ही कहीं...
कभी तो सपनों मे आ,
मुझे भी तेरी दुनिया मे ले जा...

#Devprabha_Paridhi

6 comments:

  1. अति सुंदर रचना है सपनो को हकीकत में उतार कर धरातल पर दिखाने का बहुत ही सराहनीय रचना

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  2. Nice effort.... living with dreams n living in the dreams... With me...gud creation... Keep it up.

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  3. Thank you so much Nardev Sir and Chinmay Sir....
    This Appreciation means a lot to me.

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  4. This comment has been removed by the author.

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  5. बेहद सुंदर भाव अभिव्यक्त किये है देवप्रभा जी

    ख्वाबों के साथ सुनहरे अहसासों में जीने का हुनर जिसे भी मालूम हो जाता है शायद वही बेहतरीन भावों को उकेरने में सफल होता है । आपसे अनुरोध है हमारा - आप काव्यांगन साहित्यिक संस्था -उदयपुर की पाक्षिक काव्य - मंजरियों में हिस्सा लेने हेतु सादर आमंत्रित है। शहर उदयपुर से काफ़ी नामचीन साहित्यकार काव्य मंजरियों का हिस्सा बने हुए हैं । हमें बहुत ख़ुशी होगी एक बेहतरीन लेखिका से हमारी टीम को मुख़ातिब होने का सुअवसर मिलेगा। हमारी संस्था विशेषतौर पर युवा साहित्यकारों को एक साहित्यिक प्लेटफॉर्म उपलब्ध करवाने का कार्य करती हैं।

    रक्षित परमार & एन.के. सनातन - फाउंडर -काव्यांगन साहित्यिक संस्था- उदयपुर ।
    आप हमारे इस मोबाईल नम्बर ( 9783440685 ) के जरिये हमारी संस्था के व्हॉट्स अप ग्रुप से भी जुड़ सकते हैं जहां आप अपनी रचनाओं को साहित्यकारों के बीच शेयर कर सकते हैं ।

    शुक्रिया ।

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  6. आपका बहुत बहुत शुक्रिया एवं आभार रक्षित जी...
    आपके शब्दों से बहुत प्रोत्साहन मिला और उससे ज़्यादा ख़ुशी हुई|
    धन्यवाद्

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