Monday, 28 November 2016

मौसम आ गया


मौसमें इश्क में खोने का मौसम आ गया,

तेरी यादों में डूबने का मौसम आ गया।।

जरा ठहरो मैं राह के काॅटे चुन के अलग कर लूॅ,

शायद अब कलियों के खिलने का मौसम आ गया।।

कुछ जरा नजरों की धुन्ध छाॅट लेने दो,

फिर से सावन बरसने का मौसम आ गया।।

पुराने जख्मों के भर जाने से खुश ना हो एहले चमन,

अब नये-नये जख्मों के मिलने का मौसम आ गया।।

मंजिल सामने दिखती है तो क्या फर्क पडता है,

हमसफर के मोड मुडने का मौसम आ गया।।

Written by-

Devprakash Prajapati