हम उम्र के एक ऐसे सख्त जमे हुए शिखर पर हैं, जहां से अगर पिघले भी तो नीचे बहना मुश्किल है— हम कौन? नीचे उतरना और बहना। पर चेहरे पर पहाड़ की ऊंचाई और कठोर चट्टानें, जो माथे पर फिक्र की शिकनें बनकर धूप में चमकती हैं।
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