Wednesday, 29 August 2018

जब रात दो बजे अमृता को फ़ोन आया कि, “साहिर नहीं रहे”

अमृता प्रीतम के मन में साहिर के लिए जो जज़्बात थे, उसे उन्होंने अपनी आत्मकथा 'रसीदी टिकट' में खुलकर बयान किया है लेकिन सबसे कठिन अमृता के लिए वह क्षण होगा जब उन्होंने साहिर के निधन की ख़बर सुनी होगी।

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