Monday, 27 August 2018

मेरी यही हसरत थी कि किताब की शक्ल में बड़ा होऊं

एक चीज जो हमारे यहां इफरात में थी, वह थी किताबें। एक दीवार से दूसरे दीवार तक ठंसी हुईं, गलियारे और रसोई में, एंट्रेंस और खिड़कियों के सिल पर-हर कहीं वे भरी पड़ी थीं।

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