Wednesday, 23 January 2019

ना जाने किसकी आस है!



बहुत रोई आँखें, फ़िर भी दिल ना हुआ ख़ाली...
ख़ूब बहे आँसू, फ़िर भी अब तक है मन सवाली !
ना जाने किसकी आस है, ना जाने कैसी प्यास है...
मिलता भी नहीँ, ना ही छूटता है !

हाथों में ही है सब कुछ, फ़िर भी मुट्ठी है ख़ाली !!!
#देवप्रभा_परिधि

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