इंटरनेट की दुनिया ने हिन्दी या कहें प्रत्येक भाषा के साहित्य और लेखन को जनमानस के करीब और उनकी पहुंच में ला दिया है। इससे रचनाकारों की लोकप्रियता में भी अभिवृद्धि हुई है। किंतु इन सबके बाद भी उनके सृजन की चोरी भी बहुत बढ़ी है। जिन लोगों को लिखना नहीं आता या सस्ती लोकप्रियता के चलते वे लोग अन्य प्रसिद्ध लोगों की रचनाओं को तोड़-मरोड़कर या फिर कई बार तो सीधे-सीधे उनका नाम हटाकर खुद के नाम से प्रचारित और प्रकाशित भी करवा लेते हैं। ऐसी विकट स्थिति में....... For more click here:
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