Sunday, 5 June 2016

कल रात हंसी एक ख़्वाब आया !!!


कल रात हंसी एक ख़्वाब आया, हाथों में उसका हाथ आया,
मैं शरमा गयी,फ़िर घबरा गयी, हौले से वो मेरे पास आया...
कल रात हंसी एक ख़्वाब आया !!!
साँसे मेरी फ़िर बढ़ती गयी, धड़कन रुकने का नाम नहीं,
जब बांहों ने उसकी मुझे घेरा, महफूज़ सा कुछ यूं मुझको लगा,
जैसे कोई हमराज़ हो वो, बरसो की मेरी तलाश हो वो,
ना जाने क्यों वो बैगाना, कुछ अंजाना कुछ पहचाना,
मुझको मुझसे ही छीन गया, और मुझको ये पता भी ना लगा...
कल रात हंसी एक ख़्वाब आया !!!
फ़िर दूर वो पल-पल जाने लगा, साँसों को मेरी बढ़ाने लगा,
मैंने भीगी पलकों से रोका उसे, जी भर के मुझे वो सताने लगा...
और दूर वो पल-पल जाने लगा !!!
अब आँख खुली तो लगता है, साथी वो मेरा तकिया है,
पर पलकें अब भी भीगी है, ना जाने कौन वो छलिया है...
फ़िर भी उससे मिलना चाहूं, यादों में उसकी रहना चाहूं,
हर ख़्वाब में उनसे मिलने को, चलो फ़िर से हम सो जाते है |
उन मीठी मीठी बातों में, और संग में प्यारी बाहों के,
शायद.......
कल रात हंसी फ़िर ख़्वाब आये, हाथों में उसका हाथ आये !!!
-DJ Paridhi